ग्रेच्युटी कैलकुलेटर — 2026 के श्रम संहिता नियमों के साथ
नौकरी छोड़ते समय आपको कितनी ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए, और उसमें से कितनी कर-मुक्त रहेगी। 21 नवंबर 2025 से लागू श्रम संहिताओं के अनुसार अपडेटेड: निश्चित अवधि (fixed-term) कर्मचारी अब सिर्फ़ 1 साल में पात्र हो जाते हैं, और वेतन आधार कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए।
त्वरित संदर्भ — आम वेतन पर ग्रेच्युटी (6 साल, अधिनियम के दायरे में)
| मूल वेतन + DA / माह | ग्रेच्युटी (6 साल) | ग्रेच्युटी (10 साल) |
|---|---|---|
| ₹25,000 | ₹86,538 | ₹1,44,231 |
| ₹40,000 | ₹1,38,462 | ₹2,30,769 |
| ₹60,000 | ₹2,07,692 | ₹3,46,154 |
| ₹1,00,000 | ₹3,46,154 | ₹5,76,923 |
इस कैलकुलेटर का गणित ओपन सोर्स और टेस्टेड है — सारे फ़ॉर्मूले और वे बारीकियाँ जो ज़्यादातर कैलकुलेटर ग़लत कर देते हैं, इंटरैक्टिव रेफ़रेंस में असली आँकड़ों के साथ देखें, या GitHub पर सोर्स पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल पूरे करना ज़रूरी है क्या?
स्थायी कर्मचारियों के लिए हाँ — 5 साल की लगातार सेवा चाहिए। मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में यह शर्त नहीं लगती, और कई अदालती फ़ैसलों में 4 साल 240 दिन को भी मान्यता मिली है। 21 नवंबर 2025 से निश्चित अवधि कर्मचारियों को सिर्फ़ 1 साल की सेवा पर ग्रेच्युटी मिल जाती है।
ग्रेच्युटी का फ़ॉर्मूला क्या है?
अधिनियम के दायरे में: अंतिम मूल वेतन + महँगाई भत्ता × 15 ÷ 26 × सेवा के वर्ष, जिसमें छह महीने से ज़्यादा का हिस्सा पूरा साल गिना जाता है। दायरे से बाहर के नियोक्ता हर पूरे साल के लिए आधे महीने का औसत वेतन देते हैं।
ग्रेच्युटी पर कितना टैक्स लगता है?
सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह कर-मुक्त है। निजी क्षेत्र में छूट सबसे कम रकम तक — वास्तविक ग्रेच्युटी, फ़ॉर्मूले की रकम, या ₹20 लाख। यह ₹20 लाख सभी नियोक्ताओं को मिलाकर जीवनभर की सीमा है।
नई श्रम संहिता से क्या बदला?
निश्चित अवधि कर्मचारियों को 1 साल में पात्रता, वेतन आधार कुल वेतन का कम से कम 50%, और 15/26 का फ़ॉर्मूला अपरिवर्तित। ये बदलाव 21 नवंबर 2025 से लागू हैं।
क्या ग्रेच्युटी CTC का हिस्सा होती है?
कई कंपनियाँ CTC में ग्रेच्युटी का प्रावधान (आमतौर पर बेसिक का 4.81%) जोड़ती हैं, लेकिन यह तभी मिलती है जब आप पात्र हों और नौकरी छोड़ें। देखें इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर और फुल एंड फ़ाइनल सेटलमेंट।