किराया रसीद — पूरे साल की 12 रसीदें, एक क्लिक में

HRA छूट के लिए ज़रूरी किराया रसीदें तुरंत बनाएँ। मकान मालिक का पैन, रेवेन्यू स्टाम्प की जगह और रकम शब्दों में — सब अपने आप। पूरी तरह मुफ़्त, कोई साइनअप नहीं, और आपकी जानकारी आपके ब्राउज़र से बाहर नहीं जाती।

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रसीद की जानकारी

ज़्यादातर कंपनियों की HR टीम अंग्रेज़ी पढ़ती है, इसलिए दोनों भाषाओं वाली रसीद सबसे सुरक्षित रहती है। आयकर कानून रसीद की भाषा तय नहीं करता।
सुझाव: अगर आप नकद में किराया देते हैं और रकम ₹5,000 प्रति माह से ज़्यादा है, तो हर रसीद पर ₹1 का रेवेन्यू स्टाम्प लगाकर मकान मालिक के हस्ताक्षर स्टाम्प के ऊपर करवाएँ।

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  • जल्द आ रहा है: किरायेदार/मकान मालिक की प्रोफ़ाइल सेव करना — सब्सक्राइबर्स के लिए मुफ़्त
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किराया रसीद में क्या-क्या होना चाहिए

HR या आयकर विभाग रसीद को तभी मानता है जब उसमें ये सब साफ़ लिखा हो। ऊपर बनने वाली हर रसीद में ये सारी बातें अपने आप आ जाती हैं:

दो गलतियाँ जिन पर HR रसीद लौटा देती है

पहली — पैन न देना। सालाना किराया ₹1,00,000 से ऊपर जाते ही मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य है। यह सीमा महीने के हिसाब से लगभग ₹8,333 बनती है, यानी ₹8,500 महीना किराया देने वाले भी इसमें आ जाते हैं। अगर मकान मालिक के पास पैन नहीं है, तो उनसे फ़ॉर्म 60 में लिखित घोषणा लेनी होगी।

दूसरी — नकद भुगतान पर स्टाम्प न लगाना। ₹5,000 प्रति माह से ज़्यादा नकद किराए की रसीद पर ₹1 का रेवेन्यू स्टाम्प चाहिए, और हस्ताक्षर स्टाम्प के ऊपर होने चाहिए। बैंक ट्रांसफ़र या UPI से भुगतान करें तो स्टाम्प की ज़रूरत ही नहीं पड़ती — और बैंक स्टेटमेंट अपने आप सबसे मज़बूत सबूत बन जाता है। इसी वजह से किराया हमेशा बैंक से देना बेहतर है।

रसीद बनाने के बाद

रसीदें केवल आधा काम हैं। आपको असल में कितनी छूट मिलेगी यह तीन में से सबसे कम रकम से तय होता है — मिला हुआ HRA, किराया घटा मूल वेतन का 10%, और मेट्रो शहर में मूल वेतन का 50% या बाकी शहरों में 40%। यह हिसाब HRA छूट कैलकुलेटर में लगाकर देख लें, और अपने शहर के लिए शहरवार गाइड देखें — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के अलावा कोई शहर मेट्रो नहीं माना जाता, बेंगलुरु और पुणे भी नहीं।

ध्यान रहे: HRA छूट सिर्फ़ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। नई व्यवस्था में पूरा HRA टैक्स योग्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HRA क्लेम करने के लिए किराया रसीद ज़रूरी है क्या?

अगर आपकी सैलरी में HRA है और आप किराया देते हैं, तो नियोक्ता छूट देने से पहले किराया रसीद माँगता है — आमतौर पर तिमाही या सालाना। रसीद में किराए की रकम, अवधि, मकान का पता, और मकान मालिक का नाम व हस्ताक्षर होना चाहिए।

मकान मालिक का पैन कब देना पड़ता है?

जब सालाना किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो — यानी लगभग ₹8,333 प्रति माह। अगर मकान मालिक के पास पैन नहीं है तो उन्हें फ़ॉर्म 60 में हस्ताक्षरित घोषणा देनी होगी, और कई कंपनियाँ उसके बिना क्लेम स्वीकार नहीं करतीं।

रेवेन्यू स्टाम्प कब लगाना ज़रूरी है?

₹1 का रेवेन्यू स्टाम्प तभी ज़रूरी है जब किराया नकद दिया गया हो और रकम ₹5,000 प्रति माह से ज़्यादा हो। बैंक ट्रांसफ़र या UPI से भुगतान पर स्टाम्प ज़रूरी नहीं — पर कुछ कंपनियाँ फिर भी माँगती हैं, इसलिए अपनी HR की नीति देख लें।

क्या हिंदी में बनी रसीद कंपनी स्वीकार करेगी?

आयकर कानून रसीद की भाषा तय नहीं करता — ज़रूरी यह है कि रकम, अवधि, पता, नाम और हस्ताक्षर साफ़ दिखें। फिर भी कई कंपनियों की HR टीम अंग्रेज़ी पढ़ती है, इसलिए यहाँ डिफ़ॉल्ट रूप से रसीद हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में बनती है। ज़रूरत हो तो सिर्फ़ हिंदी या सिर्फ़ अंग्रेज़ी भी चुन सकते हैं।

क्या मैं अपने माता-पिता को किराया देकर HRA ले सकता हूँ?

हाँ, बशर्ते सब कुछ असली हो — मकान माता-पिता के नाम हो, किराया सचमुच बैंक से भेजा जाए, और वे उसे अपनी आयकर रिटर्न में आय के रूप में दिखाएँ। सिर्फ़ कागज़ पर किया गया इंतज़ाम, जिसमें पैसा कहीं नहीं जाता, खारिज कर दिया जाता है। पति या पत्नी को किराया देकर HRA नहीं लिया जा सकता।

क्या मेरा डेटा कहीं सेव होता है?

नहीं। रसीदें पूरी तरह आपके ब्राउज़र में बनती हैं और सिर्फ़ आपके अपने डिवाइस पर सेव होती हैं। कोई भी जानकारी किसी सर्वर पर नहीं भेजी जाती।

कोई टूल चाहिए जो यहाँ नहीं है? आइडिया बोर्ड पर बताएँ — सबसे ज़्यादा माँगे गए टूल पहले बनते हैं।