वेतन पर्ची बनाएँ — 60 सेकंड में, मुफ़्त
अपने कर्मचारियों के लिए साफ़-सुथरी सैलरी स्लिप बनाएँ — भत्ते, PF, ESI, व्यवसाय कर और TDS की कटौती, और शुद्ध वेतन शब्दों में। पर्ची हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में छपती है, ताकि कर्मचारी को समझ आए और बैंक भी स्वीकार करे।
100% मुफ़्त
साइनअप नहीं
बैंक और वीज़ा के लिए सही फ़ॉर्मेट
कुछ भी अपलोड नहीं होता
वेतन पर्ची में क्या होना चाहिए
एक काम की वेतन पर्ची में तीन हिस्से होते हैं — कर्मचारी की पहचान, आय, और कटौतियाँ। बैंक लोन, क्रेडिट कार्ड, वीज़ा और किराए पर मकान लेते समय यही तीनों देखे जाते हैं:
- कंपनी का नाम और पता, और वेतन का महीना।
- कर्मचारी का नाम, आईडी, पदनाम और विभाग।
- भुगतान योग्य दिन और बिना वेतन अवकाश (LOP) — इनसे पता चलता है कि पूरा महीना काम हुआ या नहीं।
- आय का विवरण — मूल वेतन, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता, विशेष भत्ता।
- कटौतियाँ — भविष्य निधि, व्यवसाय कर, TDS, ESI।
- शुद्ध वेतन — अंकों में और शब्दों में दोनों।
- अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता की जगह।
तीन बातें जो अक्सर गलत होती हैं
मूल वेतन बहुत कम रखना। कई छोटी कंपनियाँ PF बचाने के लिए मूल वेतन को CTC का 20–30% रख देती हैं। नए श्रम संहिता नियमों के तहत मज़दूरी की परिभाषा में कुल पारिश्रमिक का कम-से-कम 50% आना चाहिए — इससे कम रखने पर बाद में बकाया देनदारी बन सकती है। अपनी संरचना श्रम संहिता ऑडिट से जाँच लें।
व्यवसाय कर हर राज्य में एक जैसा मान लेना। महाराष्ट्र में सालाना ₹2,500 है, कर्नाटक में ₹25,000 मासिक वेतन से ऊपर ₹200 प्रति माह, जबकि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में यह लगता ही नहीं। गलत राज्य की दर काटना कर्मचारी का पैसा गलत काटना है। राज्यवार दरें यहाँ हैं।
नियोक्ता का PF अंशदान कर्मचारी की कटौती में दिखा देना। कर्मचारी की पर्ची में सिर्फ़ उसका अपना 12% अंशदान कटौती में आना चाहिए। नियोक्ता का अंशदान CTC का हिस्सा होता है, कटौती नहीं — दोनों को मिला देने से शुद्ध वेतन गलत बैठता है।
पर्ची बनाने के बाद
अगर आप यह देखना चाहते हैं कि किसी CTC पर हाथ में कितना वेतन आएगा, तो इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। नियुक्ति पत्र चाहिए तो ऑफ़र लेटर जनरेटर है, और कर्मचारी के हिसाब-किताब के लिए फुल एंड फ़ाइनल कैलकुलेटर।